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Sunday, 21 May 2017

आयो राजा प्यास बुझा दो राजा

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Hindi sex story हैल्लो दोस्तों, ये घटना आज से करीब एक साल पुरानी है। जब में अपनी पढ़ाई को पूरी करने के बाद किसी भी छोटी या बड़ी नौकरी की तलाश में था, लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी मुझे कोई भी नौकरी नहीं मिल रही थी और में नौकरी ढूढने की वजह से अब बहुत थक चुका था, इसलिए एक दिन मैंने मन ही मन सोचा कि अब कुछ ना कुछ किया जाना चाहिए। फिर मैंने बहुत बार सोचकर अब बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का विचार अपने मन में कर लिया था, जिसमें में बहुत जल्दी सफल भी रहा, क्योंकि मुझे एक घर में एक लड़की को पढ़ाने का काम मिल गया था। मेरी वो स्टूडेंट जिसको में पढ़ाता था उसका नाम किरण था और उसकी उम्र 18 साल थी। वो बहुत ही आकर्षक और सुंदर थी। वो दूध जैसी गोरी, उसका साफ रंग, हल्के भूरे रंग के बाल, नीली आंखे, गुलाबी होंठ और उसका फिगर उस समय करीब 30-24-28 था। Hindi sax stories वो बहुत खुले विचारों की, हंसमुख स्वभाव की लड़की थी। उसका अपनी पढाई के अलावा किसी चीज़ किसी और काम में उसकी कोई रूचि नहीं थी। उसके पास एक कंप्यूटर और नेट भी था, लेकिन वो नेट को बस अपनी पढ़ाई के लिए काम में लेती थी। दोस्तों में पिछले कुछ सालों से यहाँ पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और एक दिन मैंने अपनी भी उस कहानी को आप सभी तक पहुँचाने के बारे में सोचा जिसको में आज तक नहीं भुला सका, क्योंकि यह मेरे जीवन का सबसे पहला सेक्स अनुभव और मेरी सच्ची घटना है जिसमें मैंने पहली बार किसी चूत को अपने सामने देखकर अपने पूरे होश खोकर मैंने उसको बहुत जमकर चूसा और उसके मज़े hindi sax story

दोस्तों अब में अपनी कहानी की तरफ आता हूँ। में हर रोज़ उसको 7 से 10 बजे तक पढ़ाने जाता था और वो भी अपना पूरा मन लगाकर मेरी हर एक बात को अच्छी तरह से समझती और मन लगाकर पढ़ाई करती थी और में भी उसको मन लगाकर पूरी मेहनत से समझाने की कोशिश किया करता, क्योंकि वो लड़की सुंदर होने के साथ साथ बहुत समझदार भी थी, जिसको पढ़ाने में मुझे बहुत मज़ा आता था। दोस्तों तब तक मेरे मन में उसके लिए कोई भी गलत विचार या ऐसी कोई भी बात नहीं थी इसलिए में उसको अपनी उस नजर से कभी भी नहीं देखता और ना ही उसके मन के ऐसा कुछ चल रहा था, लेकिन एक दिन ऐसा हुआ और वो मेरे लिए जीवन भर याद रखने वाली बात बन गई। मेरे साथ ऐसा क्या हुआ अब आप सभी विस्तार से सुनकर उसके मज़े लीजिए। दोस्तों यह बात 15 तारीख की है जब में हर हर दिन की तरह उस दिन भी अपने ठीक समय पर उसके घर पहुंच गया और तब मुझे पता चला कि वो उस दिन घर पर बिल्कुल अकेली थी, क्योंकि उस दिन उसके मम्मी पापा और उसका भाई एक प्रोग्राम में गए हुए थे। फिर मैंने हर दिन की तरह उस दिन भी घर पहुंचकर दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया और फिर कुछ देर बाद उसने आकर दरवाजा खोला और वो मुझसे बोली कि सर आप आ गए? दरवाजा बंद करके अंदर आ जाए और वो मुझसे इतना कहकर खुद अपना बेग लेने दूसरे रूम में चली गई और में जहाँ पर में उसको हर दिन पढ़ाता था उस कमरे में जाकर खड़ा हो गया जब वो वापस मेरे आई तब वो मुझसे कहने लगी कि सर मेरा पीसी बहुत दिनों से ना जाने क्यों बहुत ज्यादा प्रोब्लम कर रहा है, प्लीज आज आप ज़रा मेरा पीसी देखकर उसको ठीक कर दें।
desi delhi girl showing off her bra and panty

 मुझको उसके हेंग होने पर काम करते समय बहुत समस्या होती है और वैसे भी आज घर में भी कोई नहीं है और घर के सभी लोग किसी प्रोग्राम में गए हुए है इसलिए हम इस काम को करने के बाद पढ़ाई को थोड़ी देर से भी शुरू कर सकते है। फिर मैंने उससे पूछा कि मुझे बताओ किरण कहाँ है तुम्हारा पीसी चलो में आज सबसे पहले उसको देख लेता हूँ कि उसकी क्या समस्या है? और वो मुझको लेकर अपने पढ़ाई वाले रूम में ले गई और उसने पीसी के सामने रखी कुर्सी पर बैठकर पीसी को चालू कर दिया और उसके मेरे लिए एक दूसरी कुर्सी अपने पास में खींच ली और उस पर उसने मुझे बैठने के लिए बोला और में उस कुर्सी पर बैठ गया। दोस्तों उसने उस दिन हल्के नीले कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था जो कि बहुत सिल्की था और इस वजह से उसकी चुन्नी बार बार नीचे खिसक रही थी और उस वजह से मुझे उसके वो गोरे गोरे बूब्स को देखने का मौका मिल रहा था और जब कई बार उसका दुपट्टा नीचे खिसका तो मैंने उससे बोला कि किरण तुम ऐसा करो कि इस दुपट्टे को उतारकर कहीं रख दो, क्योंकि तुम बार बार इसको सही करती हो और यह बार बार गिर जाता है और वैसे भी आज घर पर में और तुम ही तो हो। फिर उसने थोड़ा शरमाते हुए अपना वो दुपट्टा अपने कंधो से नीचे उतारकर पास वाली टेबल के ऊपर रख दिया और फिर उसने पीसी का पासवर्ड डालकर अपने पीसी को शुरू कर दिया। में उस समय उसके पास दूसरी कुर्सी पर बैठा हुआ था और में पीसी को देख रहा था। तभी अचानक से मेरी नज़र किरण की छाती पर चली गई तो में देखता ही रह गया उसके बूब्स बहुत ही गोरे टाईट और गोलमटोल उभरे हुए थे और उसकी वो कमीज़ भी बहुत टाइट होने की वजह से वो और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। मेरी नज़र उसके बूब्स पर ही जाकर रुक गई। तभी अचानक से उसी समय किरण ने मेरी तरफ देखकर मुझसे बोलना चाहा तभी उसने देखा कि मेरा पूरा ध्यान उसके बूब्स पर था कि में उसके बूब्स की तरफ घूर घूरकर देख रहा हूँ  hindi sax story

फिर उसने उसी समय अचानक से अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपना वो दुपट्टा टेबल से उठा लिया और उसको अपनी छाती पर डाल लिया और अब वो बहुत अजीब तरह से मेरी तरफ देखकर बोली कि सर प्लीज आप पीसी को देखो ना इसके साथ में क्या समस्या है और यह बार बार इतना हेंग क्यों होता है? तो मैंने उसकी आवाज सुनकर होश में आकर एकदम से पीसी की तरफ अपनी नज़र कर ली और फिर में उसको चेक करने लगा। अब कुछ देर बाद माउस से काम करते समय मेरी कोहनी बहुत बार उसके बूब्स के साईड पर लग रही थी, जिससे कि उसके बूब्स साईड से मेरी कोहनी से दब भी रहे थे। यह सब मुझसे अनजाने में हो रहा था, लेकिन जब मुझे इस बात का अहसास हुआ तो में अब जानबूझ कर अपनी कोहनी को उसके बूब्स की तरफ ले जा रहा था मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन बहुत बार ऐसा करने से वो अब कुछ कुछ समझ गई थी कि में यह सब जानबूझ कर रहा हूँ इसलिए वो अपनी कुर्सी को थोड़ा सा आगे करके मुझसे थोड़ी सी दूरी बनाकर बैठ गई। अब में एक बार फिर से माउस से पीसी को चेक करने लगा और मैंने धीरे से अपनी कोहनी को थोड़ा सा पीछे करके में दोबारा से उसके बूब्स को छूने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसका पूरा ध्यान अब अपने पीसी पर था वो तो मुझे अपना पीसी ठीक करते हुए देख रही थी और फिर मैंने अपनी कोहनी को पीछे करके उसके बूब्स पर रगड़ना शुरू कर दिया और एक बार फिर से उसका वो दुपट्टा नीचे सरककर गिराने लगा। वो बार बार नीचे आ रहा था। फिर मैंने दोबारा उससे बोला कि किरण तुम अपना यह दुपट्टा नीचे उतार दो ना, तुमने दोबारा इसको अपने से लगा लिया। अब वो मुझसे कहने लगी कि सर में इसको जरुर हटा दूंगी, लेकिन एक बार फिर से आप मुझे वैसे ही देखने लगेंगे और मुझे आपका इस तरह से मुझे घूर घूरकर देखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मुझे बहुत अजीब सा महसूस होता है। 
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फिर मैंने उसको बोला कि किरण में तुम्हे देख ही तो रहा था, मैंने तुम्हारे साथ कुछ भी तो गलत नहीं किया? तुम वैसे भी आज इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हो, इसलिए मेरी नजर अपने आप बार बार तुम्हारे ऊपर जा रही है। फिर वो मेरी उस बात को सुनकर थोड़ा सा शरमा सी गई और अब में भी समझ गया कि इसको भी मेरा यह सब करना बुरा नहीं लग रहा है। वैसे भी वो एक लड़की है तो उसको मेरे इस तरह से देखने पर पहली बार थोड़ा अजीब सा या शरम भी तो आएगी ही और वो सब आना एक स्वभाविक कारण है। तभी मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसका दुपट्टा अपने ही हाथ से खुद ही उतारकर एक साइड में रख दिया, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली। फिर मैंने एक बार फिर पीसी को देखना शुरू किया और मैंने अपनी कोहनी से उसके बूब्स को हल्के से दबाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो अब थोड़ा अजीब सा महसूस करने लगी। फिर में उसकी उस बैचेनी को देखकर मेरी हिम्मत अब थोड़ी सी ज्यादा बढ़ गई और मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और अब मैंने धीरे धीरे उसकी जांघ को अपनी ऊँगली से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी जांघे बहुत मुलायम भरी हुई थी और फिर कुछ देर बाद वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज सर अब आप आपका यह हाथ यहाँ से हटा लें। दोस्तों ये कहानी आप इंडियन भाभी पिक पर पड़ रहे है।
फिर मैंने उससे पूछा कि क्यों किरण क्या हुआ तो वो कहने लगी कि मुझे पता नहीं, लेकिन आपके हाथ रखने से मेरे पूरे शरीर में कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है। फिर मैंने उससे पूछा कि क्यों मेरे हाथ लगाने से तुम्हे ऐसा क्या हुआ? तो वो शरमा गई, लेकिन मुझसे कुछ ना बोली जिसकी वजह से मेरी थोड़ी और हिम्मत बढ़ गई और में उसके मन की बात को बिना कहे समझ गया और मैंने बिना देर किए उसका एक हाथ पकड़कर अपने हाथ से पकड़ लिया और मैंने अपने हाथ को उसके बूब्स के क़रीब करके बूब्स को धीरे से दबा दिया और सहलाने लगा। फिर वो अब मेरी इस हरकत से शायद नाराज होकर अपनी उस कुर्सी पर से उठकर बाहर जाने लगी, 

लेकिन उसी समय मैंने उसको पीछे से जाकर अपनी बाहों में जकड़ लिया वो बहुत बेकाबू हो रही थी और बोली कि सर प्लीज आप छोड़ दें मुझे, यह सब गलत है, लेकिन मैंने उसको उसी समय पकड़कर पीछे की तरफ से उसकी गर्दन पर किस कर दिया। अब वो बोली कि सर प्लीज यह सब सही नहीं है, आप प्लीज छोड़ दीजिए मुझे, तब मैंने उससे बोला कि नहीं किरण प्लीज तुम आज मुझे बहुत अच्छी लग रही हो, प्लीज आज कोई घर पर भी नहीं है यह हमारे लिए बहुत अच्छा मौका है। फिर वो कहने लगी कि सर प्लीज आप छोड़ दो मुझे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और फिर मैंने उससे पूछा क्यों पहले भी क्या कभी किसी ने तुम्हारे साथ यह सब करने की कोशिश की है? तो वो बोली कि जी नहीं, लेकिन में ऐसी लड़की नहीं हूँ जैसा आप मुझे समझ रहे है प्लीज आप ऐसा ना करें और अब आप चले जाए यहाँ से, लेकिन मैंने उसको एक बार फिर से अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया और वो मुझसे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करती रही, लेकिन मैंने उसको चूमना तब भी जारी रखा और उसने अपने को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैंने उसको ज़ोर से पकड़ा हुआ था और में उसकी गर्दन पर किस करता जा रहा था और फिर मैंने कुछ देर बाद पीछे से ही उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर दबाना और गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया। फिर वो अब भी अपने आप को छुड़ाती रही और मुझसे कहने लगी कि प्लीज सर अब आप छोड़ दें मुझे, यह सब मेरे साथ ना करें, में कोई ऐसी लड़की नहीं हूँ प्लीज छोड़ दें मुझे, लेकिन में तो उसके गोरे सेक्सी बदन को अपनी बाहों में लेकर उसके मुलायम बूब्स को दबाकर बिल्कुल पागल होकर अपने होश खो बैठा था और में उसकी गर्दन को चूस रहा था और उसके बूब्स को दबा रहा  hindi sax story

फिर मैंने उसकी कमीज़ उसके बाद उसकी ब्रा के अंदर अपना एक हाथ डालकर मैंने उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और वो लगातार चीखती रही और मुझसे मना करती रही कि प्लीज सर आप अब छोड़ दें मुझे। मेरे साथ ऐसा कुछ भी ना करें प्लीज। अब मैंने उसको उसके बूब्स से कसकर पकड़ा हुआ था और में उसके बूब्स की निप्पल को हल्के से सहला रहा था। फिर कुछ देर बाद में सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी सलवार में ले गया और उसकी पेंटी के अंदर अपना हाथ डालकर अब में उसकी मासूम सी चूत को सहलाने लगा था। तभी मैंने महसूस किया कि थोड़ी देर उसकी चूत को सहलाने और अपना हाथ उस पर घिसने से वो भी अब धीरे धीरे मस्त होनी लगी और उसकी वो मुझसे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश उसका वो विरोध अब बहुत कम हो गया था और कुछ देर वो विरोध बिल्कुल खत्म सा हो गया था, लेकिन वो अब रो रही थी।

hindi six storyफिर मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी एक ऊँगली को डालने की कोशिश की तो वो चीख पड़ी और बोली कि प्लीज सर अब बस करो और मेरी इस हरकत की वजह से वो अब शायद झड़ गई, क्योंकि मुझे उसकी चूत गीली महसूस हुई वो मेरी बाहों में एकदम निढाल हो गई थी, लेकिन मैंने फिर भी उसकी चूत को सहलाना अब भी जारी रखा। वो धीरे धीरे बहुत ढीली पड़ गई और अब वो एकदम मस्त हो गई।

फिर मैंने सही मौका देखकर उसकी सलवार को नीचे करने की कोशिश की तो मैंने देखा कि उसकी उस सलवार में ईलास्टिक होने की वजह से मुझे उसको नीचे करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और झट से उसकी सलवार नीचे हो गई। फिर उसके साथ साथ मैंने उसकी पेंटी को भी नीचे करके पहली बार किसी कुंवारी चूत को अपने सामने देखा कि यह वो पहली चूत थी जिसके दर्शन में अपने सामने कर रहा था। उस बिना बालों वाली चिकनी चूत को देखकर में बिल्कुल पागल हो चुका था और मुझे नहीं पता था कि में अब उसके साथ क्या करूंगा और में क्या करने जा रहा हूँ? और अब मैंने बिना देर किए उसको पास वाले सोफे पर एकदम सीधा लेटा दिया और में अपनी जीभ को उसकी कुंवारी, कामुक चूत पर रखकर मैंने उसकी चूत को पहले ऊपर से चाटना उसके बाद उसकी गुलाब जैसी कोमल पंखुड़ियों को फैलाकर अंदर से चूसना शुरू कर दिया में अपनी जीभ से उसकी चूत के उस लाल दाने को भी टटोल रहा था, 

जिसकी वजह से वो एकदम जोश में आकर उछल पड़ती। दोस्तों वो मस्ती से मस्त होती जा रही थी और अब वो मोन करनी लगी आह्ह्ह्ह हम्मम्मम्मम प्लीज सर अब मत करो आह्ह्हह्ह आपको आपकी माँ की कसम है प्लीज छोड़ दें मुझे आईईईईइ सुउुउउ ऊऊउईईईई प्लीज सर छोड़ दो ना अम्म्म्मम्‍म्म्मम ओह्ह्ह्हह। फिर मैंने उसकी चूत के छेद को थोड़ा सा खोला और अपनी जीभ को उसकी चूत के छेद में डालकर में अपनी जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा। फिर मेरे ऐसा करने की वजह से वो और भी ज्यादा जोश में आकर मस्त हो गई और उसने आवाजें निकालना शुरू कर दिया अहह्ह्ह्हह्ह बस नहीं आह्ह्ह्हह एम्म्म प्लीज छोड़ दो ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ ऊऊह्ह्ह्ह प्लीज छोड़ दो मुझे और वो ऐसे मचलते हुए एक बार फिर से झड़ गई उसने मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर से दबा दिया, जिसकी वजह से मेरे मुहं में ही उसकी चूत का पानी निकल गया। में उसको तब भी चाटता रहा और वो आह्ह्ह्हह ओईईईईई प्लीज बस करो एम्मअहह ओईईई बस करो प्लीज सर, लेकिन में तब भी उसकी चूत को चाटता और अपनी जीभ से चोदता रहा और अब वो अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे साथ मना करते हुए मज़ा लेती थीhindi six story
दोस्तों वो सच में बहुत ही प्यारी मासूम लड़की थी और वो बहुत जवान भी थी और में उसकी चूत को चाटता रहा और इतने में उसके घर की घंटी बजी और मैंने जल्दी से उसके ऊपर से हटकर अपने कपड़े ठीक किए और मेरे साथ वो भी खड़ी होकर अपने कपड़े पहनकर ठीक करने लगी। फिर बाद वो दरवाजा खोलने चली गई और में उसी समय वहाँ से उसको छोड़कर सीधा अपने घर पर भाग आया और उसके बाद में कभी भी दोबारा उसके घर पर नहीं गया और ना मैंने उससे मिलने की कोई भी कोशिश करना उचित समझा ।

Saturday, 15 April 2017

Hawas Ki rani XXX bhojpuri bhabhi pic

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Hawas Ki rani XXX bhojpuri bhabhi pic
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम नमन है और घर पर सभी लोग मुझे प्यार से बंटी बुलाते हैं। दोस्तों आज में आप सभी मेरी मकान मालकिन से चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ। वैसे यह कुछ समय पुरानी बात है और में उस समय 12वीं में पढ़ता था। में जिस मकान में रहता था, उसकी मकान मालकिन की उम्र करीब 36 साल थी, लेकिन वो इतनी उम्र होने के बाद भी एक बहुत ही सेक्सी औरत थी और में उन्हे आंटी कहकर बुलाता था और उन आंटी का नाम रोमा था और में उनकी सुन्दरता का दीवाना था, मुझे जब भी मौका मिलता था, में उनसे बात ज़रूर करता और इसी बहाने मुझे उनके गोरे गोरे बूब्स को निहारने का मौका मिलता था और में आंटी के बूब्स को देखकर एकदम पागल हो जाता था, क्योंकि उनके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे और साड़ी के आँचल से उनकी एक झलक ही मुझे मिल जाए तो में यही सोचकर उनसे बात करता था। फिर में बातों के बीच में उनके बड़े साईज़ के बूब्स, गांड को देखता रहता और शायद धीरे-धीरे इस बात का अंदाजा आंटी को भी लग गया था कि में उनके जिस्म को घूरता रहता हूँ।
फिर वो भी अब कभी कभी अपने पल्लू को जानबूझ कर गिरा देती और गहरे गले के ब्लाउज से गोल गोल बूब्स दिख जाते, लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि आंटी सेक्सी तरीके से कपड़े पहनती थी, जैसे कि जालीदार गहरे गले के ब्लाउज, जालीदार ब्लाउज से उनकी ब्रा भी साफ साफ दिखती थी और उनकी साड़ी भी नाभि से बहुत नीचे हुआ करती थी और में उनके अंग अंग का दीवाना था। उनके रसीले होंठ, मदमस्त कर देने वाले बूब्स, नाभि, गांड और वो सब कुछ जो उनमे मौजूद था, वो मेरी रातो की रानी थी और में जब भी मुठ मारा करता था तो में उन्ही के बारे में सोचता था और में किस्मत वाला था कि मुझे रोमा आंटी के घर में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके पति जब ऑफिस चले जाते थे, तब वो घर पर अकेले हुआ करती थी और ऐसे में जब मेरी उनसे मुलाकात हो जाती, तब में मौके का फ़ायदा उठाकर बहुत देर बातें करता था। उन पर क्या जवानी छाई हुई थी? 36 की उम्र होने के बाद भी वो एक सेक्स बम थी। मेरा लंड हर रोज उनके बारे में सोच सोचकर पानी छोड़ दिया करता था।





फिर एक बार मेरे माता-पिता दस दिन के लिए हमारे एक करीबी रिश्तेदार के घर दूसरे शहर गये हुए थे और मुझे खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए आंटी ने कहा कि में उन्ही के घर पर खाना खा लिया करूँ। फिर में उनकी यह बात सुनकर बहुत खुश था और वैसे भी इतना अच्छा मौका कौन गँवाना चाहेगा, तो में 8 बजे उनके घर जाता था और खाना खाने के बाद वापस अपने कमरे में चला आता था, उस वक़्त तक अंकल भी घर पर ही होते थे और फिर दो दिन बाद अंकल की कंपनी ने उनको मीटिंग के लिए दिल्ली भेज दिया और अब आंटी घर पर बिल्कुल अकेली हो गयी। फिर में उस रात को भी हर रात की तरह 8 बजे आंटी के घर पहुँचा, आंटी ने दरवाज़ा खोला और हर बार की तरह वो सेक्सी गहरे गले का ब्लाउज और जालीदार साड़ी में थी और में उस गहरे गले के ब्लाउज में से उनके सुंदर बूब्स को निहार रहा था, वो जब मूड कर जाती तो में उनके जालीदार ब्लाउज से उनकी काली ब्रा और पीठ को देखता, दोस्तों वाह क्या जिस्म था और मेरा तो मन कर रहा था कि उन्हे पकड़ लूँ और पूरे बदन को बारी बारी से चूमूं और उनकी गांड भी एकदम भरी पूरी थी और में सोचता था कि ऐसी गांड को मारने में कितना मज़ा आएगा, लेकिन आज तक मैंने किसी लड़की को नहीं चोदा था, इसलिए में इन सब बातों को केवल सोचता ही था। फिर मुझे आंटी बहुत खुश नज़र आ रही थी, शायद उनको भी मेरे दिल की इच्छा का पता चल गया था और वो भी मेरे साथ बैठकर खाना खाने लगी और फिर खाना खाते-खाते अचानक से उनका पल्लू नीचे सरक गया और मुझे उनके बड़े-बड़े बूब्स दिखने लगे और में तिरछी नजर से उनको देखता रहा, आंटी को भी मज़ा आ रहा था और उन्होंने पल्लू को नीचे गिराकर छोड़ दिया। फिर वो कहने लगी कि मुझे यह साड़ी बहुत परेशान करती है, मेरा तो जी करता है कि में इसे उतार दूँ। एक तो इतनी ज़्यादा गर्मी और ऊपर से यह साड़ी, यह कहते हुए उन्होंने साड़ी को निकाल दिया और अब वो ठीक मेरे सामने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में थी और हमेशा की तरह उनका पेटीकोट नाभि से बहुत नीचे था और आंटी अब मुझ पर ज़ुल्म ढा रही थी, क्योंकि उनका अधनंगा जिस्म मेरी आँखों के सामने था और फिर आंटी अब दोबारा से खाना खाने बैठ गयी। फिर खाना खा लेने के कुछ देर बाद वो मुझसे बोली कि बंटी मुझे रात को अकेले में डर लगता है तो जब तक तुम्हारे अंकल नहीं आ जाते, तुम मेरे घर पर ही रात को रुक जाया करो। फिर में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन खुशी से झूम उठा और में अपनी कुछ किताबें आंटी के घर ले आया और में सोच रहा था कि शायद मुझे दूसरे कमरे में सोना होगा और इसलिए मैंने किताबों को आंटी के रूम में ना रखकर पास वाले कमरे में रख दिया।
फिर आंटी ने कहा कि क्यों बंटी मेरे साथ सोने में तुम्हे क्या कोई आपत्ति है? प्लीज तुम मेरे साथ ही सो जाओ ना, तुम अपनी पढ़ाई करना और में भी वहीं सो जाऊंगी और जब तुम्हारा जी चाहे तो तुम भी वहीं सो जाना। फिर में आंटी के पास में सोने के ख्याल से बिल्कुल पागल हो रहा था, क्योंकि मैंने आज तक जिससे केवल बात की थी, मुझे आज उनके साथ सोने का मौका भी मिल रहा था और उस समय गर्मी बहुत ज़्यादा थी, इसलिए आंटी ने मुझसे कहा कि बंटी तुम अपनी शर्ट उतार दो। तुम इतनी गर्मी में केवल पेंट में भी रह सकते हो और में तो सोते वक़्त ब्लाउज भी नहीं पहनती, केवल ब्रा और पेटीकोट ही पहनती हूँ। फिर अचानक से आंटी के मुँह से ‘ब्रा’ जैसे शब्द सुनकर में बहुत रोमांचित हो गया और फिर क्या था, वो अपना ब्लाउज खोलने लगी और वो जैसे जैसे हुक खोलती जाती और उनके उभरे हुए बूब्स बाहर आ जाते। फिर आख़िर में उन्होंने ब्लाउज खोल दिया और उसे एक तरफ फेंक दिया, ज़ालिम आंटी के बड़े बड़े कसे हुए बूब्स उस काली ब्रा में दबे हुए थे, उन्हे देखकर मेरा मन कर रहा था कि उनके बूब्स को मसल दूँ और जीभ से चाट लूँ और चूस लूँ, लेकिन मुझे संयम बनाए रखना था।
फिर जैसे तैसे मैंने पढ़ाई में ध्यान लगाना शुरू किया और थोड़ी ही देर बाद आंटी बोली कि बंटी मेरी कमर में दर्द हो रहा है, अगर तुम बुरा ना मानो तो तेल से इसकी मालिश कर दो? तो यह बात सुनकर मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा। फिर मैंने लंड को ठीक किया और आंटी के करीब पहुँच गया। फिर आंटी बोली कि तुम बुरा मत मानना, में तुमसे मालिश करवा रहीं हूँ, क्या करें दर्द इतना ज़्यादा हो गया है। फिर मैंने कहा कि इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, आपको जो भी काम हो करवाना है करवा लीजिए, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। फिर क्या था? मैंने आंटी की कमर की मालिश शुरू कर दी और उनके मक्खन की तरह कोमल बदन पर मेरे हाथ घूमने लगे और मेरा लंड खड़ा होने लगा। फिर मैंने आंटी के शरीर को हाथ लगाते ही वो बोली हाँ कितना अच्छा लग रहा है, मेरे बदन की थकान जैसे कि तुमने खत्म कर दी। फिर वो बोली कि थोड़ा और नीचे दबाना और मेरे पेटीकोट को भी उतार दो। इससे तुम्हे मालिश करने में आसानी होगी और मुझे भी आराम मिलेगा। दोस्तों मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने कुछ नहीं किया तो इस पर आंटी बोली कि सोच क्या रहे हो पेटीकोट को उतार दो और फिर दोबारा ऐसा सुनते ही मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और उसे नीचे सरका दिया। फिर आंटी की गोरी और गोल-गोल गांड मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उनकी गांड के आस पास मालिश शुरू कर दी और में उनकी गांड को धीरे-धीरे मसल रहा था और आंटी भी सिसकियाँ ले रही थी, उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बोली कि ज़रा ज़ोर से मसलो ना, दर्द बहुत ज़्यादा है और आज तुम्हे ही मेरे जिस्म के दर्द को खत्म करना है। फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और अब मुझे भी ऐसा करने से बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड जो सांप की तरह खड़ा था, उनके पैर में रगड़ रहा था। फिर आंटी बिल्कुल नासमझ बनते हुए बोली कि यह क्या है मेरे पैरों के पास? तो मैंने कहा कि आंटी यह मेरा लंड है, तो इस पर आंटी ने कहा कि अपना लंड अपनी आंटी को नहीं दिखाओगे और एक बार जी भरकर में भी तो देखूं कि मेरे बंटी का लंड कैसा है? और यह कहते हुए वो एकदम उठ गयी। दोस्तों आंटी ने पेटीकोट के नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी, इसलिए उनकी चूत उनके झांटो के बीच से साफ साफ दिखाई दे रही थी।
फिर आंटी ने मेरी पेंट को खोल दिया और अब में केवल अंडरवियर में था और फिर उन्होंने मेरी अंडरवियर को पकड़ा और उसे भी नीचे कर दिया। मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हुआ था और उनकी चूत को सलामी दे रहा था। फिर मेरे खडे लंड को देखकर आंटी बोली कि बाप रे तुम्हारा लंड कितना बड़ा है और यह तो एकदम तनकर खड़ा है और क्या अपनी आंटी के जिस्म को देखकर तुम भी बेताब हो गये? क्यों बंटी क्या कभी किसी लड़की को चोदा है? और इस 8 इंच के लंड का क्या फ़ायदा? अगर इसे इस्तेमाल ही ना किया हो और ऐसा कहते ही आंटी उसे अपने मस्त होठों से चूम लिया। फिर मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी। फिर आंटी ने धीरे से कहा कि क्या तुम मुझे चोदोगे? और अब वैसे भी इस लंड का इस्तेमाल होना चाहिए ना, क्योंकि ऐसे लंड को देखकर मेरी भी जवानी भड़क उठी है और आज सारी रात हम लोग चुदाई करते हुए बिताएँगे, क्यों बोलो चोदोगे ना अपनी आंटी को। फिर में आंटी की यह बात सुनकर एकदम खुशी से झूम उठा और मैंने थोड़ा घबराते हुए कहा कि क्यों नहीं। फिर आंटी बोली कि आज की रात मेरी जवानी तुम्हारे नाम हुई बंटी तुम आज जितना चाहो इसके मज़े ले लो, में तुमसे कुछ भी नहीं बोलूँगी।
फिर आंटी एकदम उठ खड़ी हुई, वो सिर्फ़ काले कलर की ब्रा में मेरे सामने खड़ी हुई थी और उनका अधनंगा जिस्म, सुडोल शरीर, मदमस्त चूत, सुंदर बूब्स और गुलाबी रसीले होंठ यह सब आज रात मेरे थे। दोस्तों मेरी तो जैसे आज लॉटरी लग गयी थी। फिर आंटी बोली कि आजा बंटी मेरे पास आ और मुझे मेरी ब्रा खोलकर नंगा कर दे और आज की रात हमारे बीच कोई दूरी ना रहे। फिर में उनकी तरफ बढ़ा और वो घूम गयी, में उनसे बिल्कुल चिपका हुआ था। फिर मैंने काँपते हुए हाथों से ब्रा का हुक एक एक करके खोल दिया और इसके बाद मैंने आंटी के कंधे से ब्रा की डोरी को नीचे कर दिया और ब्रा को उतार कर फेंक दिया और अब आंटी पूरी तरह से नंगी थी। फिर मैंने आंटी को बेड पर लेटा दिया और उनके रसीले होठों को अपने होठों के बीच दबाकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, इससे आंटी भी जोश में आ गयी और उल्टा उन्होंने मुझे नीचे कर दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी और मेरे होठों को चूसने लगी। आंटी ने अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दिया और अंदर तक घुमाने लगी और अब हम दोनों एक दूसरे के मुँह को अपनी जीभ से चूसे रहे थे।
दोस्तों आंटी के क्या रसीले होंठ थे? मुझे ऐसा लग रहा था कि हम लोग एक दूसरे के होठों के रस को चूस डालेंगे, तो आंटी के बाल मेरे चेहरे पर बिखरे हुए थे और वो मेरे मुँह को अपनी जीभ से चूसे जा रही थी और इसके बाद मैंने उनके बूब्स को मसलना शुरू किया, वाह क्या मुलायम बूब्स थे आंटी के, साली ने क्या जिस्म पाया था। ऐसे जिस्म को तो मन करता है कि में चोदता ही रहूँ, में अपने दोनों हाथों से आंटी के बूब्स को मसल रहा था। फिर आंटी जोश में आ गयी और बोली कि मेरे राजा और ज़ोर से मसलो, जितना मसलोगे मुझे उतना ही मज़ा आएगा, हाँ ले लो इनको अपने मुँह में और पी लो इनका रस और यह कहते हुए आंटी ने मेरे सर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबा दिया। फिर मैंने भी उनके बूब्स को मुँह में ले लिया और छप छप की आवाज़ से चूसना शुरू कर दिया। अपनी जीभ से उनके निप्पल को चाटा और उनके निप्पल एकदम खड़े थे और अब आंटी सिसकियाँ लेने लगी और उनकी सिसकियों की आवाज़ पूरे कमरे में भर गयी और आंटी की सिसकियों की आवाज़ से माहौल और भी गरम हो रहा था।
फिर वो बोलने लगी कि हाँ एक एक करके दोनों को चूस लो और मेरे यह बूब्स तुम्हारे होठों के लिए तरस रहे है, प्लीज आज अपनी आंटी को खुश कर दो और फिर में जोश में आकर और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और बीच बीच में अपने दातों से उन्हे दबा भी देता था। फिर आंटी बोल उठती अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्हह्ह थोड़ा धीरे तू बड़ा ज़ालिम है, लेकिन सच पूछो तो ऐसे दातों के बीच जब तुम मेरे बूब्स को दबाते हो तो मेरी कामुकता और भड़क उठती है और अब मुझसे नहीं रहा जाएगा, चल बंटी अब मेरी चूत को चोदने को तैयार हो जा और यह कहकर आंटी ने अपने दोनों पैर फैला दिए और एकदम चित हो गयी। फिर उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और उसके ऊपर से चमड़ी को नीचे कर दिया और बोली कि चल बंटी घुसा दे अपने लंड को मेरी चूत में और घपाघप मेरी चूत मारना शुरू कर दे। एक हाथ से आंटी ने मेरे लंड को पकड़ा और फिर अपनी चूत में घुसा दिया और आंटी एकदम दर्द से कराह उठी उूउफफफ्फ़ माँ आई मर गयी उह्ह्ह अह्ह्ह्ह इतना मोटा लंड मेरी चूत में डलवाने से मेरी चूत फट जाएगी, अह्ह्हहह सच बंटी तू बड़ा ज़ालिम है और आज तूने अह्ह्ह्हह्ह् आईईईईईई मुझे बहुत खुश कर दिया और मैंने जरा भी नहीं सोचा था कि एक 18 साल का लड़का एक 36 साल की औरत को इतनी अच्छी तरह से चोद सकता है और आज से मेरी जवानी तुम्हारी गुलाम हो गयी है, बस आज से दस दिन और दस रातें केवल मेरी चुदाई होगी और में तुझसे इतना चुदवाउंगी कि मेरी चूत फट जाए।
फिर में उनकी यह बात सुनकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर आंटी की चूत को चोदने लगा। आंटी भी अपनी गांड को उठा उठाकर धक्के मार रही थी और हम दोनों एक जिस्म हो गये, कभी में आंटी के ऊपर होता तो कभी आंटी मुझे नीचे कर देती और वो मुझे लगातार चूमे जा रही थी और जोश में वो काँप रही थी और हम जिस बेड पर हम चुदाई कर रहे थे, वो भी अब ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था और पूरे कमरे में बेड की चूं चूं की आवाज़ और आंटी के सिसकियों की आवाज़ गूँज रही थी, लेकिन हम दोनों चुदाई में मस्त थे। फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के देक़र घपाघप उनकी चूत मार रहा था, घर्षण से कुछ तकलीफ़ भी हो रही थी। तभी आंटी ने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाल लिया और फिर उसे मुँह में लेकर अपनी जीभ से चाटकर अपना थूक लगा दिया और अब आंटी बोली कि ले बंटी तेरे लंड पर मैंने अपना थूक लगा दिया। तुझे अब चोदने में और भी मज़ा आएगा और अब तुम्हारा लंड आसानी से अंदर बाहर हो जाएगा, चल अब फिर से शुरू हो जा चोद दे मुझे और फाड़ दे मेरी चूत।
मैंने अपना लंड फिर से आंटी की चूत में घुसा दिया, लेकिन इस बार वो बहुत आसानी से फिसलता हुआ अंदर घुस गया और फिर से मेरी और आंटी की चुदाई शुरू हो गयी, लेकिन अब हम और भी जोश में आ गए थे। आंटी अपनी गांड को उठा उठाकर मुझे नीचे से धक्के दे रही थी और इसके बाद उन्होंने मुझे नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी। दोस्तों आंटी और में वासना के आग में जल रहे थे, मेरा लंड आंटी की चूत में घुसा हुआ था और आंटी अपनी गांड को ऊपर नीचे कर रही थी और सिसकियाँ ले रही थी, हाँ बंटी अह्ह्ह्हह्ह उह्ह्ह्हह्ह्ह्हह् तेरा लंड और मेरी चूत आईईईईईइ अब ऐसे ही मज़ा करेगी, तू अपनी पढ़ाई को तो कुछ दिनों के लिए भूल जा, क्योंकि ऐसा मौका बार बार नहीं आएगा। फिर जब आंटी मेरे ऊपर चढ़कर मुझसे चुदवा रही थी तो हमारे ज़ोरदार झटके से उनके बूब्स उछल रहे थे, वाह क्या नज़ारा था। फिर मैंने कहा कि जानती हो आंटी में जब भी हस्तमैथुन करता था तो आपके बारे में ही सोचता था और आप मेरे रातों की रानी थी, लेकिन आज मेरा सपना सच हो गया है और पढ़ाई तो बाद में भी हो जाएगी, लेकिन ऐसा मौका नहीं मिल पाएगा और इन दस दिनों तक में अपनी सारी दिल की तमन्ना पूरी करूँगा, बोलो क्या मेरा साथ दोगी ना?
फिर आंटी बोली कि मेरे जानेमन यह चूत अब तुम्हारे लंड की दीवानी हो गयी है और अब तुम जैसे चाहो वैसे मुझे चोदो, तो यह बात करते करते हम दोनों चुदाई करते रहे और पलंग ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था, आंटी मुझे अपने दातों से धीरे-धीरे काट भी रही थी। फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी मुझे लगता है कि मेरा लंड अब झड़ने वाला है, बताओ कहाँ पर निकालूं? लेकिन आंटी ध्यान दिए चुदवा रही थी और आख़िर में मेरा लंड झड़ गया और अब तक एक बार आंटी की चूत भी अपना पानी छोड़ चुकी थी। फिर मैंने अपना लंड आंटी की चूत से बाहर निकाल लिया और हम दोनों लेट गये और हम दोनों इस चुदाई से बहुत खुश थे। फिर थोड़ी देर बाद हमारी वासना फिर से जाग उठी। आंटी बोली कि बंटी थोड़ा नीचे हो जाओ, लेकिन में समझ नहीं पा रहा था कि आंटी मुझसे नीचे होने को क्यों कह रही हैं। फिर आंटी ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया और में मस्ती में आ गया। फिर वो बोली कि कैसा लग रहा है लंड चुसवाना? और मेरा जी चाहता है कि में तुम्हारे लंड को इसी तरह चूसती रहूँ। फिर उनके नाज़ुक होंठ और जीभ मेरे लंड का मज़ा ले रहे थे और वो कह रही थी, हाँ और चोदो राजा, हाँ और मेरे मुँह को और ज़ोर से। फिर मैंने आंटी के सर को पकड़ लिया और अपने लंड को मुहं के अंदर बाहर करने लगा।
तभी थोड़ी देर में आंटी इतना गरम हो गयी कि वो ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को चाटने लगी और धक्के दे देकर मुहं में लंड लेने लगी और में थोड़ी देर में फिर से एक बार और झड़ गया और मेरे लंड का पूरा पानी आंटी के मुहं में चला गया और आंटी ने उसे पी लिया, लेकिन आंटी अब भी वासना की आग में जल रही थी और फिर उन्होंने मुझे पलट दिया और गांड के छेद को भी चाटने लगी और वो बोली कि चल बंटी में आज तुझे अपनी चूत का स्वाद चखाती हूँ और में आज तुझसे अपनी चूत चटवाऊँगी। आंटी ने अपने दोनों पैरों को फैला दिया और मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, वाह आंटी की चूत की क्या खुश्बू थी। फिर मैंने उनकी झांटो को जीभ से चाटना शुरू कर दिया, आंटी की झाँटे गीली हो गयी। फिर मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत में घुसा दिया और अंदर तक घुसाकर चाटने लगा, आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने अपनी जीभ से आंटी की गांड को भी चाटना शुरू कर दिया और उनकी गांड पर जैसे ही मेरी जीभ लगी, आंटी के बदन में बिजली सी दौड़ गयी और वो बोल पड़ी वाह बंटी तू बहुत तेज़ है, औरत को सबसे ज्यादा उत्तेजित करने वाले हिस्से को तुमने छू दिया है और हाँ चाट चाट और चाट, मेरा पानी झड़ने वाला है, अपने मुँह को और करीब ला, में मेरा सारा चूत रस तुम्हारे मुँह में दे दूँ और कुछ देर के बाद आंटी झड़ गयी और मैंने उनका चूत रस पी लिया और रात भर की चुदाई से वक़्त बीतने का पता नहीं चला और सुबह के 7:00 बज गये और रात के 11:30 बजे शुरू हुई हमारी चुदाई सुबह के 7:00 बजे तक चलती रही और आंटी मुझसे दिल खोलकर चुदती रही और मैंने भी अपने दिल की सारी भड़ास निकाल ली। फिर आंटी ने कहा कि थोड़ी देर के लिए हमे चुदाई को रोकना होगा, क्योंकि अभी दूधवाला और कामवाली भी आती ही होगी और उनके जाने के बाद हम अपनी कामक्रीड़ा दोबारा से शुरू करेंगे और में आज तो दिन में भी तुमसे चुदवाउंगी मेरे जानू, क्योंकि तुमने मेरी चूत पर अपने लंड का नशा चड़ा दिया है और अब तो मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए फड़क रही है। फिर मैंने कहा कि मेरी रानी अगर इतनी ही आग है तो क्यों ना चलो हम फिर शुरू हो जायें तो आंटी बोली कि अभी नहीं, लेकिन मुझ पर यकीन करो 9:00 बजे के बाद जब कोई नहीं आएगा तो में तुम्हे दोबारा मज़ा दूँगी।
फिर ऐसा ही हुआ, जैसा कि आंटी ने कहा था और जब 9:00 बजे के बाद सारे लोग चले गये, आंटी कमरे में आई और उन्होंने जालीदार मेक्सी पहन रखी थी, लेकिन उन्होंने उसके अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था, इसलिए उनकी चूत, गांड और बूब्स साफ साफ दिख रहे थे और में तो एकदम नंगा बिस्तर पर लेटा हुआ था। फिर आंटी ने मेरा लंड पकड़ लिया और चूसने, चाटने लगी और फिर वो बोली कि चलो बंटी हम दोनों साथ में नहाते हैं, में तुम्हारे बदन को मसलूंगी और तुम मेरे जिस्म को रगड़ना और यह कहकर उन्होंने अपनी मेक्सी को खोल दिया। फिर हम दोनों बाथरूम में घुस गये, पानी चालू करके हमने नहाना शुरू किया और मैंने साबुन लेकर आंटी के मखमली बदन में लगाना शुरू किया और अपनी एक उंगली को चूत में डाल दिया और उंगली से चूत चोदने लगा। फिर आंटी उत्तेजित हो गयी और उन्होंने मुझे ज़मीन पर गिरा दिया और मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाल दिया और में बाथरूम में आंटी को चोदने लगा और में ज़ोरदार धक्के दे रहा था और आंटी गांड उठाकर और तेज़ धक्के दे रही थी, लेकिन आंटी बहुत ही कामुक थी और उस वासना की आग में हम दोनों जल रहे थे और हमें ऐसा लग रहा था कि 10 रात और 10 दिन केवल चुदाई में बीत जाएगी। दोस्तों हमारी बाथरूम की चुदाई थोड़े देर में खत्म तो हो गई, लेकिन 15 मिनट बाद हमारी दूसरी चुदाई फिर से शुरू हो गयी और हम लोग 24 घंटे में 12 घंटे तक लगातार चुदाई करते रहे, लेकिन दोस्तों मुझे आंटी की वो चुदाई हमेशा याद रहेगी ।।

Hawas ki chudai kahani-savita bhabhi stories aur chudai xxx pic

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दोस्तों मेरा नाम अनिकेत सिंह हैं और मैं लुधियाना का रहनेवाला हूँ. वैसे मैं अपनी इंजिनियरिंग की पढाई के लिए पिछले २ सालों से दिल्ली में ही हूँ. और आज की यह हिंदी सेक्स स्टोरी भी दिल्ली में हुए एक सच्चे और हॉट हादसे की ही हैं. आज मैं आप को बताऊंगा की कैसे मैं दोपहर को एक भाभी को चोदा था वो भी छत के ऊपर.
उस भाभी का नाम कुलवंत कौर था और वो मेरे मकानमालिक बिट्टू सिंह की बहु थी. उसका पति दलेर काफी सालों से लंदन में था और उस भाभी की हरियाली चूत को सुखा करने के लिए उसे पीछे छोड़ के गया था वो. भाभी कलवंत के रूप के बारे में बताऊ तो वो एक २५ साल के करीब की हॉट औरत हैं. उसके फिगर का नाप कुछ ३२-३०-३४ का होगा. उसकी गांड देखने से बनती हैं और आँखे भी शराब की प्याली के जैसी हैं उसकी. दलेर सिंह पैसे कमा रहा था लेकिन इस यौवन के प्याले को पीछे छोड़ के गया था मेरे जैसे सेक्स पारखू के लिए. पहले दिन से ही मेरा दिमाग इस भाभी की चूत के गुलाबजामुन को खाने के लिए मचल रहा था. लेकिन बुढा बिट्टू सिंह डेढ़साना था. वो जानता था की दिल्ली में इंजीनियरिंग करने वाले लौंडे कितने खतरनाक होते हैं. वो कभी भी भाभी को मेरे करीब आने नहीं देता था.
और फिर मेरी किस्मत से एक बार इस बूढ़े को टाइफोइड हुआ और उसे अस्पताल में भरती किया गया. भाभी की ननंद जो दिल्ली में ही रहती हैं वो यहाँ आ गई. भाभी टिफिन बनाती थी और उसकी ननंद लाडो हॉस्पिटल में रहती थी बूढ़े के पास. इस बिच में मैं भी चांस मार रहा था भाभी के ऊपर. वो कम ही बोलती थी.
एक दिन जब वो खाना पका रही थी तो मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुसा. जानबूझ के तौलिया मैंने नहीं लिया था और कपडे भी बहार सोफे पर ही रख के मैं अन्दर चला गया. कुछ देर तक लंड को साबुन लगा लगा के मैंने खड़ा किया और फिर भाभी को आवाज लगाईं.
भाभी प्लीज़ मेरे कपडे देंगे मैं भूल गया हूँ.
आई, रोटी उतार के.



एक मिनिट में जब वो आई तो मैंने उसके कदमो की आवाज महसूस की. मैंने लंड पर दो हाथ और मारे और उसे टाईट किया. भाभी ने बाथरूम के दरवाजे पर कपडे और तौलिया रखा, और तभी मैंने अपना प्लान अमम में रख दिया. मैंने पाँव फिसलने की एक्टिंग की और दरवाजे पर अपनी आधी बोड़ी को धकेल दिया. दरवाजा खुल गया और मैं लड़खड़ाने की एक्टिंग कर रहा था. कलवंत भाभी की नजर ना चाहते हुए भी मेरे कसे हुए लंड पर आ गई. वो उसे सब कुछ भूल के देख रही थी. मैं खड़ा हुआ और भाभी के हाथ से कपडे लिए और लंड को ढंक लिया. भाभी तब होश में आई और हंस पड़ी.
मैंने कहा क्या हुआ?
भाभी कुछ नहीं बोली और वो किचन की और चली गई. मैं तौलिया लपेट के ही उसके पीछे चला गया. तौलिये में भी मेरा लंड अपना अकार बनाये हुए था. किचन में भाभी ने मुझे और मेरे कसे हुए लंड को तिरछी नजर से देखा और चुपचाप रोटी सकने लगी, मेरा लौड़ा बौखला गया था. मेरे सामने भाभी की गांड थी जो नाइटी में एकदम मादक लग रही थी. अन्दर उसने पेंटी नहीं पहनी थी इसलिए गांड की फांक में कपडा घुसा हुआ था. अब आप तो जानते ही है की यह सिन कितना मादक होता हैं. मैं भाभी के पास गया तो वो फट से मेरी और मुड गई. मैंने देखा की उसकी साँसे फूली हुई थी. मैं अपने चहरे को उसके करीब ले गया तो उसने आँखे बंध कर दी. मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चहरे को पकड लिया और अपने होंठो को उसके होंठो पर लगा दिया. भाभी ने मेरे सर को अपनी तरफ खिंचा और किस देने लगी, हमारे होंठ एक दुसरे से जुड़ चुके थे और भाभी किस साँसों की खुसबू से मेरा लोडा और भी टाईट हो गया. वो भाभी के पेट पर चुभा भी होगा.
मैंने हाथ आगे किया और भाभी के पेट पर रख दिया. फिर धीरे धीरे कर के हाथ को बूब्स की तरफ बढ़ा दिया. वो साँसे बढ़ा चुकी थी और मेरे हाथ को उसने पकड लिया. मैंने जबरन उसके बूब्स पकडे और दबा दिए. बाप से इस भाभी को काफी दिनों से चोदा नहीं गया था और वो बेताब थी.
लेकिन फिर पता नहीं उसे क्या हुआ की उसने मुझे धक्का दे दिया और वहां से हट गई. वो छत की तरफ गई. मैं भी सीडियां चढ़ के ऊपर गया. ऊपर मस्त धुप थी, भाभी सुखाये हुए कपडे लेने लगी तो मैंने पीछे से उसे पकड लिया.
भाभी ने कहा, यह गलत हैं.
मैंने कहा, मैं आप को प्यार करता हूँ भाभी, इसमें क्या गलत हैं.
मैं शादीसुदा हूँ.
लेकिन आप अकेली भी हैं और मुझसे यह देखा नहीं जाता हैं.
कही कुछ अनर्थ हो गया तो.
मैं अन्दर नहीं निकालूँगा आप के, फिर तो कुछ नहीं होगा न.
नहीं नहीं, यह गलत हैं.
मेरी आँखों में आँखे डाल के कहिये की आप मुझसे प्यार नहीं करती हैं. और आप मेरे साथ ख़ुशी के दो चार पल बांटना नहीं चाहती हैं, आइने फ़िल्मी स्टाइल में डायलोग बोल दिया.
और साला यह डायलोग काम कर गया. भाभी ने मुझे गले से लगा लीया और मैंने उसकी गांड पर हाथ रख दिया. मैं धीरे से उसकी नाइटी को हटा के गांड की फांक को खोलने लगा था. भाभी ने कहा, आह्ह्ह ह्ह्ह्हह.
मैंने कहा, डार्लिंग मुझे पता है की तुझे बहुत टाइम से चोदा नहीं गया हैं. लेकिन आज तेरे सब ख्वाब पुरे कर दूंगा.
जल्दी करो, मेरी ननंद आ जाए उसके पहले.
मैं जान गया की भाभी को जल्दी ही चोदना पड़ेगा क्यूंकि उसकी ननंद के आने का वक्त हो चला था..
भाभी ने अपने हाथ से अपनी नाईटी को ऊपर किया. धुप सख्त थी इसलिए हम दिवार के करीब आ गए. फिर मैंने भाभी की झांट से भरी हुई चूत को टच किया. भाभी के मुहं से सिसकी निकल पड़ी. मैंने अपने लंड को तौलिये को हटा के आजाद कर दिया. भाभी ने अपने हाथ को आगे कर के लंड को पकड़ा और बोली, बहुत बड़ा हैं तुम्हारा तो. कितनो को चोदा हैं इस से?
मैंने जूठ बोलते हुए कहा, बस आप से पहले एक को ही चोदा हैं, जिसे मैं प्यार करता था!
भाभी हंस पड़ी और मैंने अपने लंड को चूत के छेद पर लगा दिया. दोपहर की गर्मी के बिच में जब मैंने अपना लंड भाभी की चूत में रगडा तो हम दोनों ही पसीने से नाहा रहे थे. भाभी को मैंने वही छत पर चोदा और वादे के मुताबिक़ माल चूत में नहीं निकाला.

फिर हम दोनों निचे आ गए और मैं फिर से नहाने चला गया. भाभी की ननंद टिफिन ले के गई और मैंने एक बार फीर से भाभी को चोदा. भाभी की चुदाई का सिलसिला जो उस दिन से स्टार्ट हुआ हैं की आजतक भी चालु हैं. मैं जब भी चांस मिले और बूढ़ा रुकावट न डाले तो भाभी को चोदता हूँ. वो भी खुश हैं और मैं भी.
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Sunday, 9 April 2017

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Saturday, 8 April 2017

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Monday, 3 April 2017

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